संस्थापक संदेश (Founder’s Message)
संतोषी शर्मा (संस्थापक)
“मानव जीवन ईश्वर प्रदत्त अनमोल उपहार है, और मृत्यु उस अनंत यात्रा का दिव्य पड़ाव।
हिंदू शास्त्र स्पष्ट कहते हैं कि जब अंतिम संस्कार धार्मिक रीति, पवित्रता और श्रद्धाभाव से संपन्न होता है, तभी आत्मा को मोक्षमार्ग में बाधारहित गति प्राप्त होती है।
मेरे भीतर इस संस्था की स्थापना का विचार अचानक नहीं आया…
इस पवित्र संकल्प का उदय उस दिन हुआ,
जब मुझे अपने ही माता-पिता –
स्वर्गीय बाबू राम (पिता जी) और स्वर्गीय सीता देवी (माता जी)
का अंतिम संस्कार श्मशान नहीं, बल्कि एक अत्यंत अस्वच्छ और अनुचित स्थान पर करना पड़ा।
यह अनुभव मेरे हृदय को भीतर तक झकझोर देने वाला था।
उस पीड़ा ने मेरे भीतर यह संकल्प जगा दिया कि—
“यदि मेरे माता-पिता को वह सम्मानित, पवित्र और शास्त्रीय स्थल नहीं मिल पाया, तो मैं समाज के किसी भी परिवार को यह पीड़ा नहीं सहने दूँगा।”
इस पवित्र संस्था की स्थापना 02 नवम्बर 2025 को सम्पन्न करने का सौभाग्य प्राप्त कर पाया। 07 नवम्बर 2025 को संस्था का विधिवत पंजीकरण भी पूरा किया गया।
हमारा यह संकल्प केवल एक सेवा नहीं—
एक धर्म, एक कर्तव्य, और हर आत्मा के मोक्षमार्ग को सुगम बनाने की साधना है।
मैं इस दिव्य कार्य में जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को सादर प्रणाम करता हूँ।”